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16 संस्कार

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 अंत्येष्टि मृत शरीर का संस्कार है ।अतः 16 में नही है । हम प्राण प्रतिष्ठा में करते है न शोडास संस्कार संपाध्यताम 

धर्म वाले

 कोई शक्ति काम कर रही है उस शक्ति पर एक बार विश्वास हो जाता है तो आत्म बल बढ़ जाता है यहाँ ही शुरू हो जाते है विविध धर्म वाले!!

जीवन का मूल्य क्या है?

 एक आदमी ने भगवान बुद्ध  से पुछा : जीवन का मूल्य क्या है? बुद्ध  ने उसे एक Stone दिया और कहा : जा और इस stone का  मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान रखना stone को बेचना नही है I वह आदमी stone को बाजार मे एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है? संतरे वाला चमकीले stone को देखकर बोला, "12 संतरे लेजा और इसे मुझे दे जा"  आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले stone को देखा और कहा  "एक बोरी आलू ले जा और इस stone को मेरे पास छोड़ जा" आगे एक सोना बेचने वाले के  पास गया उसे stone दिखाया सुनार उस चमकीले stone को देखकर बोला,  "50 लाख मे बेच दे" l  उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..  उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू ने इसे बेचने से मना किया है l आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे stone दिखाया l  जौहरी ने जब उस बेसकीमती रुबी को देखा , तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस बेसकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका l  फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेसकीमती रुबी? सारी का

मथुरा काशी

 उसके साथ भगवन चले !!! अध्यात्म के सुर चंदा और बिजली नमक फिल्म में नीरज की रचना वाला गीत में जिसके साथ कोई ना हो उसको याद कराया गया है -- साथ ना जिसके चलता कोई उसके साथ भगवन चले !! और भी कहा है -- ढूंढे जिसे मन सामने है वो जाए न पहेचाना लेकिन !! किस्मत की बात तो देखो !! फिर भी यात्रा वालो को कह भ डाला है दिल है तेरा साफ तो प्यारे घर में मथुरा काशी है !!

अशांति

 સુખ થી સગવડ મળે છે શાંતિ નહીં દુઃખ અગવડો ને કારણે છે પછી શાંતિ કયા થી ? સગવડ માટે અશાંતિ ઉભી કરી તો દુઃખ આવ્યું !! અગવડો ચલાવી લેતા અશાંતિ વધી!! तो फिर चलो सगवड़ ही करे   भले अशांति हो अवरोधम सततं खलु राग जरा संभाल रे

मंथन

 एक जगह मैंने पढ़ा था ! इस दुनिया में हमारे आने से पहले ज्ञान और धन तो था ही !! जो ज्यादा इकठ्ठा कर ता है वो ज्ञानी या तो धनी या इन  से युक्त बनाने से कहलाता है !! सभी इसी होड़ में ज्यादातर लगे रह कर चले जाते है !! तो यह बात तो सीधी सादी बनी रही !! वैसे भी लेकर तो कोई जाता नहीं है !!मेरे पिताजी ने परमेश के भजन में बताया है की दूध से दही और दही से छास और छास से माखन बनता है वैसे मंथन करना तुम्हारा काम है !! ज्ञान का मंथन करो और इसी समाज को वापस करो !!

भगवान को वंदन ।

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हिन्दू फिलोसोफी में परमात्म तत्व एक ही है और सर्व व्यापी है। देव मनुष्य किन्नर गंधर्व इत्यादि  विविध योनि है ।भगवान शब्द संबोधन है । ये गुण जिसके पास होते है वो भगवान कहलाता है । ऐश्वर्यस्य समग्रस्य यशस: श्रीय: । ज्ञानवैरा ग्य यो श्च एव षणा म इतिरणा ।। अगर ये गुण आप मे है तो आप भी भगवान बन सकते हो ।जैसे ज्ञानवान धनवान इत्यादि वैसे ये छह गुण वाले भगवान कहलाते है । इनका जीवन होता है ।जैसे बुद्ध महावीर राम कृष्ण ईसु वगैरह ।