संदेश

इस लिए मन की दवाईया बिकती है !!

ये कीर्ति और ये लख्मी !! बड़ी उस्ताद है !! आकर्षण तो  देखो !! जलाती है और दौड़ में डाल देती है !! अरे अभिमान करने में मज़ा आता है !! माया तूने बड़ा फसाया !!

Rajendraprasad Vyas: अज्ञान

ये काल है !!

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किसीके लिए वक्त रुकता नही है !!

अपने अपने हिसाब से

यह विश्व में पृथ्वी के कई  जिव है !! हर एक जीवात्मा अपने अपने हिसाब से जिंदगी जीता है !! गजब की बात तो तब लगती है जब इंसान दो वक्त की रोटी के लिए भटकता है !! अरे इन समाज में ऐसा तो फंस जाता  है कि खाने पीने की व्यवस्था नहीं कर पाता है !!अब मेरे भाई इस सृष्टि के रहस्य महान रचना कार  परम तत्व को  कैसे जान पायेगा!! यह आध्यात्मिक विषय है ।इसी लिए आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए भी पहले स्वस्थ बनाना ही  होगा !!बाकी भूखे को क्या राम क्या इसु क्या अल्लाह !!कुछ बदमाश धार्मिक गुरु ऐसे फंसे हुए  को आध्यात्मिक शराब पिलाते है और बड़ी भीड़ दिखाके शो करते है !! भीड़ बढाओ शो करो   महान बन जाओ !! ये भूखे या लालचु लश्कर इकठ्ठा करने से ईश्वर के दर्शन नहीं होंगे !!जो 100 रुपये तक कमा लेना नहीं जानता उसे हम जिस सृष्टि में जीते है उसके रचना कार महान तत्व  जिसकी कीमत लगाई जा न सके उसे जान लेने की बात कैसे हो पायेगी !! खुद तन मन धन  जैसी क्षुल्लक सामान्य चीज़ को पा नहीं सकता वो ये विराट परम तत्व को कैसे जान सकेगा !! अध्यात्म का रास्ता तब ही सही ही पायेगा जब तुम  सामान्य जीवन से संतुष्ट  तो बनो !!

ज्ञान ज्योति में राम रे

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तन दौड़ैत है मन ही फंसत है
हँसत आत्म ज्ञान रे
मन बुद्धि है लगाम ज्ञान की
ज्ञान ज्योति में राम
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ये तो मैं थोड़ा हु।ए पंच  भूत सागर में ये मेरा राजू नामक देह प्रकाश है।प्रतिक्षण आवेग से दौड़ता !! ये लिखना तो इसी देह प्रकाश क्रिया का कर्म प्रकाश है !! कुर्वन्ति ते तू कर्म प्रकाशम !!
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हरी से दूर भयो मिली माया !!
कौन कहत तू काहे फसाया !!
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ईश्वर से ईश्वर ।


પ્રગટ

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મન થઇ સુખ દુઃખ ભોગવીએ છીએ અને દેહ વડે તેને પ્રગટ કરીએ છીએ
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જગત નિંદ્રા તણો એક ઝુલો ઝૂલતો
સપન કેરા બુંદ થી રંગ ડાલે
ધન્ય તું પેખ પરકાશ આતમ તણો
ભેખ ધારણ ભયો સાખી ભાવે

તઈ ગયા નામ રૂપ તે જ ભરખી જશે
સ્મૃતિ સૃતી દેહજા સર્વ જાશે

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આમ જોવા જઈએ તો જીવિત સેલો ના સમૂહો  જ છે !!આ નામો દેખાતા ચિત્રો નાં છે .પરમાત્મા ના કિરણ અંશો અર્થાત આત્મા જે તે ગ્રુપ ને પ્રભાવિત કરે છે તે જે તે નાં દેહ રૂપો  નામ યુક્ત છે
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निद्रा जीवन लब धब !!

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पंडित जगन्नाथजी के खबर अंतर पूछने गया था !! उन्हें भूल जाने की बिमारी हो गई थी।उम्र के हिसाब से भी यह असर थी। वो कहते थे जैसे कोई मूवी की क्लिप चालू होती है और फिर कुछ नहीं !एक गेप आ जाती है !!फिर शरू होती है फिर बंद !!इसी बात को लेकर परेशां थे वो !!
बस इस बात को जीवन में भी ले सकते है हम सब । जैसे जीवन और निद्रा !! हम जीवन की  पर से देखते है निद्रा को !! निद्रा कीओर से देखो ! निद्रा पमें भी जीवन की क्लिप्स आती है न?
इस दुनिया को भूलने के लिए तो तैयार ही हो !! अरे भाई अब तो नींद आ रही है !!