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February 28, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आपका माल इन लोगो को काम का ना भी हो !!

आजकल कई लोगो के यह पीड़ा है की मेरी यह बात लोग समजते नहीं है !!!तो इसीका जवाब यह है शायद आपका माल  इन लोगो को काम का ना भी हो !! जैसे कोई पंडित मुर्खके पास कितनी भी शोध की बात करे उसका कोई अर्थ नहीं है !! इसीलिए मैंने संत ज्ञानेश्वर भेइसा को वेद पढ़ाने की बात याद रखली है !! आपका किया किसके काम का है यह तो विवेक की बात है !! इसीलिए विवेकहीन पंडित भी मुर्ख साबित होता है !! मिथ्या वाद विवाद करने वाले ज्यादातर करके आपका मजा ही लेते है !! इसीलिए हमेशा एरिया ध्यान में रख के चले !! सुना है लक्ष्मी और सरस्वती का फोटो साथ ही होता है । किसीने बेकार ही पंडितो को डराया दिया  है !! विवेकहीन की बात अलग है !!! यहाँ सरस्वती का मान  नहीं रहता है !! यह लक्ष्मी जी को पसंद नहीं है !!!
मुर्ख को समजाने के लिए कभी कभी ज्यादा समय लगता है !! और यह सीधी सी बात है !! लेकिन ये मुझे समजे ही !! मै उसे समजा के छोडूंगा !! यह जिद्द ममत आपको भरी पड सकता है !! क्यों की जिद्द और ममत दोनों विवेक नहीं है !!

 मैंने  सुना  था --अविद्या याने  अविवेक !!

जीवन अवस्था

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मुझे अभी जाना हुआ महाभारत के व्याख्यान में ! श्री दिनकर जोशी के । वहा कुछ चर्चा में मैंने यह बात बताई की जीवन वैसे चर अवस्था में है । जो की हमें तिन का परिचय है । एक तो यह और दूसरी निद्रा और तीसरी जो है वो स्वप्न की ! तीनो में हम खो जाते है ! निद्राधीन को लोटरी लगे के कोई ख़राब समाचार मिले नींद में वो कहा होता है ! किन्तु उसकी हाजरी तो है ही ! स्वप्न में भले एक घंटे का हो हम तो अम्रीका भी घूम आते है ! सब उसमे सच लगता है किन्तु स्वप्न टूटते !!!बस वैसे ही चौथा लोक है ! जो अध्यात्मिक है हमें मालूम नहीं ! शिव महिम्ना स्तोत्र में उसे तुरीयं ते धाम ... करके लिखा है पुष्प दन्त ने !!