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June 16, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सतत घूमना भ्रमण मंथन !! क्यों !!!

एक जगह मैंने पढ़ा था ! इस दुनिया में हमारे आने से पहले ज्ञान और धन तो था ही !! जो ज्यादा इकठ्ठा करता है वो ज्ञानी या तो धनी या इन दोनों से युक्त बनाने से कहलाता है !! सभी इसी होड़ में ज्यादातर लगे रह कर चले जाते है !! तो यह बात तो सीधी सादी बनी रही !! वैसे भी लेकर तो कोई जाता नहीं है !!मेरे पिताजी ने परमेश के भजन में बताया है की दूध से दही और दही से छास और छास से माखन बनता है वैसे मंथन करना तुम्हारा काम है !! ज्ञान का मंथन करो और इसी समाज को वापस करो !!