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October 26, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्थापन

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स्थापन के बाभी ऐसी बेध्यानी रखते है की इसका पुरा रहस्य नही रहता यहा एक स्थापन की चर्चा की है । स्थापन वस्तुतः समस्त आकाशीय नक्षा है । देवादि शक्तियों का रहस्य है । देव वस्तुतः शक्तिया है ! जो समष्टि चल रही है उसीके कामअनुसार देवताये है । मूल + और - शक्ति या को देव देवी ऐसे कहे गए है । सभी धर्मो में ये बाते एक सी लेकिन तरीके अलग से है !कर्मकांड में इसी बात का ध्यान रक्खा दिखता है !ब्राह्मण द्वारा किए गए इन नकाशो का अभ्यास जरुरी है । पूजा ओ के पीछे छुपे वैज्ञानिक दृष्टी जानो । इसी बात को वास्तु एवं दिगपाल के स्थापन में देखे !!पूरा अवकाश दिखाई देगा !!

आध्यात्मिक jyotish