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August 26, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आयुर्वेद उपवेद ज्योतिष वेदांग

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आयुर्वेद उपवेद ज्योतिष वेदांग-आयुर्वेद धनुर्वेद ऐसे चार उपवेदा है। और जो छ: वेदांग है उसमे एक अंग ज्योतिष है *। आयुर्वेद देह कीबाते करता है ! कहता है अन्न से रस बनता है यह धातु है !ऐसी सप्त धातु है !रस जो है वह छः ** है !वो # बनाते है पञ्च तत्वों से ! पृथ्वी जल से मधुर रस जो कफ करता है!अवकाश वायु से तिक्त जो वात करता है और अग्नि जल से लवण जो पित्त करता है !!वैसे वात पित्त और कफ की उत्पत्ति कही गई है !! अब ये जो पञ्च भुत है अग्नि-मंगल,भूमि -बुध,वायु-शनि,जल-शुक्र और आकाश -गुरु !! यहाँ ज्योतिष शुक्र वार को खट्टा खाओ या ना खाओ क्यों कहता है अप्प को समाज में आयेगा !! यही बात पञ्च तत्वों से देवो की है !! यह पंच बिज जो प्राणप्रतिष्ठा जब की मूर्ति की होतीहै तब बोले जाते है !! ऐसे यह देह सम्बन्ध बताता है !! यही बात रही कफ से तम:,पित्त से सत्व और वात से रज: गुणों की !!यह तन मन और संसार का सम्बन्ध खाना स्वभाव प्रकृति का समजना प्राचीन रूशी मुनि यो की दीर्घदृष्टि है !!

** रस,रक्त,मांस,मेद,अस्थि,मज्जा,वीर्य #!मधुर,अमला,लावन,टिकता,कषय,कटु *शिक्षा कल्प व्याकरण ज्योतिष निरुक्त एवं छंद