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तत्व फल

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भारतीय ज्योतिष शास्त्र में देखेंगे की पञ्च तत्वों की बात है । पश्चिम ने चर तत्त्व बताये है । चीनी ज्योति ष ने पञ्च बताये है किन्तु उसने लाकडा और धातु के साथ पानी,अग्नि, पृथ्वी तत्त्व बताकर पञ्च कहा है । यहाँ कोई जगह पर कुछ उल्टा सीधा समाजमे आता है ! अब भारतीय ज्योतिष में देखेंगे की राशी तो चर में ही बताई है !! जैसे पश्चिम में ! अग्नि पृथ्वी (भूमि) वायु वारी (जल) !! और इसे कई वर्षो से हँसक के नाम से जन्माक्षर में लिखे जा रहे है !! ग्रहों में सूर्य (आत्मा -अग्नि) ,चन्द्र (मन -जल), गुरु आकाश ,मंगल अग्नि, बुध भूमि ,शुक्र जल ,शनि वायु ऐसे है !आयुर्वेद उपवेद है ! आयुर्वेद ने भी पञ्च महाभूत की ही बात की है !आकाशवायु से वात,अग्नि जल से पित्त ,और जल भूमि से कफ़ कहा है ! वात पित्त कफ़ आयुर्वेद में मुख्य है ! इसी चक्कर को समजने से ज्योतिष रहस्य समजा जायेगा !!जो विकार है वो इच्छा ,द्वेष ,सुख, दुख: ,पिंड ,चेतना और धृति है । आयुर्वेद की कमाल तो देखो ! पितृ सम्बन्ध की बात जो वेदों मै मिलती है उसमे पितृ ओ सम्बन्ध रुतु ओ से बता या है !