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January 21, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वेदांग को समजो

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शिक्षा कल्प ज्योतिष निरुक्त व्याकरण और छंद ये सब ६ अंग वेड के कहे गये है। वेदों में जो देवताओ का वर्णन है वो सब के भी आयुष्य है। और ये सब शक्तिया अपने अपने कार्यो में रत है । मनुष्य का पंच भूतो से बना देह इन्हे समज पता है लेकिन देख नही सकता ! मनुष्य का विकास अब तक केवल पृथ्वी और थोड़ा कुछ चंद्रके बारेमे !!अरे हमारी करुणता तो यह है की आकाश में कितने तारे है इसकी स्पष्ट संख्याभी पता नही है । लेकिन शो बाजी में चालक लोग केवल अंहकार और अज्ञान फेलाते रहते है । इसीलिए रिलिजियानो और पोलितिसियानोकी चुन्गालसे छूटकर वास्तविक ज्ञानकी दिशामे बढे तो शान्ति मिलती है । वेदकी विविध विभागोके देवो का लेखन ज्योतिश्शात्रमे इसी प्रकार है इसे उपयोगमे लेनेसे फल्काथान्मे अच्छा रहता है।