जीवन तीन है


जीवन तीन है । एक आध्यात्मिक संसार तीसरा स्वप्न विचारमे । इसलिए अगर कोई कहे के मेरा पुरा जीवन दुखमय है तो समजना की वो ३३% दुखी है । संसारमे इतने घुस जाते है की बाकिका कुछ दिखता ही नही । लुटने वाले इतना लुटेगे की ख़ुद को राहगीर बनके खडा रहना पडेगा। दुसरो को यह बतानेके लिए की इस रस्ते मत जाओ यह लुट लेगा कोई आपको ।
कोई कहता है की मृत्यु निद्रा जैसा है तो एक बात ये भी है । इसकाअर्थ ये भी तो होगा की मृत्यु हर बार आ आ के लेजाता है बार बार मृत्युका अनुभव होता है। फिरभी जीवात्मा डरता रहता है । और वो भी इज्सको बार बार मिलता है उससे ! माया समजती है ये तो निद्रा थी!

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