मिले या न मिले !!

भाग्य और कर्म में यह बात है की कर्म हम कर सकते है !! और कर्म करने से देह और मन को व्यायाम मिलता है !! और व्यायाम जरुरत से ज्यादा कम नहीं होना चाहिए यह नियमन  जरुरी है !! फल की बात तो प्रकृति के अधीन है !! मिले या न मिले !!

बस यह सत्य है !! इसीलिए चिंतन,मार्ग दर्शन ,अध्यात्म,ज्योतिष जैसे विषय जिन्दा ही रहेंगे !! आशा उत्साह जीवन है !! 
शंका ,संशोधन,दृष्टी कर्म के लिए जरुरी है और  कर्म के बिना जीना संभव नहीं है इसी लिए विज्ञानं का विकास होता ही रहेंगा !!!
बस यही तो है माया !!!

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