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फैंटसी में खुद को अवतार मान लेने वालो की भी कमी नहीं है !!

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आत्मा  का सम्बन्ध मन अवं शरीर से समजे !! आत्मा से मन प्रकाशित होता है किन्तु मन को संसार भी चाहिए !!  एक विराट अवकाश है !! अगर मन ये विराट  अवकाश में गया तो इतना गति मान होते हुए भी कुछ नहीं कर पाता  है !! जैसे देखो नींद में ! बेशुध्धि में !! अरे  दिमाग के कुछ पुर्जे ज्ञानतंतु इधर उधर होते है तो बड़ा पंडित भी कुछ पहचान नहीं पाता   !! कहा गई मन की ताकत !! सर्जरी कराइ है कोइदिन !! क्लोरोफॉर्म तुम्हे खुद  भुला देता है !! बस इसी लिए ही संसारका अवरोध अच्छा लगता है !! वह सुख भी है और दुःख भी !! लेकिन वो दिशा शुन्य बेशुध्ध स्थिति नहीं है !! कई मुर्ख आध्यात्मिक साधक इसको ध्याना वस्था समज  लेते है !! वास्तव में तो यह मेडिकल केस  है !!  यह मन जागृत अवस्था में ही हाथ में नहीं रख पाता  वो भला कैसे यह चक्कर समाज पाएंगे !! और इसी प्रकार की फैंटसी में खुद को अवतार मान लेने वालो की भी कमी नहीं है !!  यह संसार का अवरोध ही परमात्मा की बड़ी कृपा है !! इसीसे भागो मत !!

गति और दिशा तो निर्जीवो के पास भी है !!

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जगत में जीव और निर्जीव  दो विभाग है ! जीवित  में  चलन  हिलना है !! अब मानो की कोई जीवसृष्टि ही  न  रही। तो  निर्जीव  रह जायेगा।  तो उसमे पृथ्वी तारे सब होंगे।  तो यह सभी वैसे  थोड़े रहेंगे ? वो तो  रहेंगे  घूमते !! मतलब निर्जीवो में भी गति तो है ही।  दिशा भी है ! अरे छोटे से एटम में न्युक्लिअस प्रोटोन इलेक्ट्रॉनों का घूमते रहना !! बस यहाँ एक बात तय होती है गति और दिशा तो निर्जीवो के पास भी है !! ये कोई मनुष्य की शोध नहीं है !! निर्जीव भी बना है अनेक एटम से और सजीव भी बना है अनेक एटम से !! और जगत की सबसे छोटी चीज़ जो आज तक समज में आई है यह एटम ही है !! एक बात खास करके याद रहे " निर्जीवो के समूहों से जीव  बनता है !!  जीवो से  निर्जीव नहीं बनता है !!" निर्जीवो इग्नोर  क्यों करते है   ?   पत्थरो से बाते करते थे किशोरकुमार !! लोग हँसते थे !! मुल्लानसरुद्दीन जाते थे अपने गाव बड़े पत्थर  शिलको   मिलने  !! और दुःख की बात ये है ज्यादातर अध्यात्मिक उपदेशक गुरु ओ क...

सज्जन के साथ कुदरत है की नहीं !!

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एक बार एक साधु ने देखा तो एक नाली के पानी में एक बिच्छु डूब रहा था।  साधु को दया आई !! उसे बचाना कर्तव्य है।  यही बात को लक्ष्य में रखते हुए  धीरे से अपने हाथ से उसे उठा लिया !! जैसे उसने उठाया तो बिच्छु ने उसे डंख मारा !! वो हाथ से छूट कर फिर पानी में जा गिरा !! किन्तु साधु ने फिरसे उसे निकला तो उसने फिरसे डंख मारा !! साधु का सिद्धांत था दुर्जन भले अपना स्वभाव न छोड़े सज्जन को अपना स्वभाव नहीं छोड़ना !! बस उसने फिर कोशिश की !! बिच्छू ने फिर डंख मारा!! साधु कराह ने लगा !! हाथ में पीड़ा बढ़ गई ! लेकिन देखो !! सज्जनो का स्वभाव !! ऐसे दर्द वाले हाथसे पूण: कोशिश करने लगा !! और वो बिच्छु डंख मारता गया। यह कहानी कुछ लोग खत्म कर देते है यह गलत है !! सज्जन सज्जनता छोड़ता नहीं ! दुर्जन दुर्जनता छोड़ता नहीं !! बात यहाँ रुकती नहीं है !! साधु का हाथ बरी बरी डंख के ज़हर से जूठा हो गया !! और वो हाथ से काम करना रुक गया !! और बिच्छु नाली में डूब कर मर गया !! अब बोलो सज्जन के साथ कुदरत है की नहीं !!

निधि अर्थात सम्पति।

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निधि अर्थात सम्पति। नव  निधि के प्रकार है !! कुछ लोगो के पास सम्पति अपनी एक ही पीढ़ी में में  खत्म हो जाती है !! कुछ  लोगो की सम्पति अगले पुत्र पौत्रादि तक चलती है !! यह भाग्य की बात है !! जैसे रोग भी वारिस  में जाते  रहते है !! पद्म यह भाग्य शैली सत्वगुणी धातु फल निरंतर है    महापद्म  सत्वगुण रत्नादि वेपार ७ पेढ़ी  मकर तमोगुणी उच्च लोगो से सम्बन्ध शास्त्र और चौर जैसे लोगो से अंत १  पीढ़ी   कच्छप यह तमोगुणी है १  पीढ़ी रहती है   मुकुंद  रजोगुणी   १  पीढ़ी रहती है नन्द तमोगुणी १/८ पीढ़ी   निल सत्व+रज: गुनी ३ पीढ़ी रहती है   शंख  राज:+तम: गुनी १ पीढ़ी रहती है !! इसलिए अपनी सम्पति का भी भुक्तने की आयु डोरी है !! बच्चे सम्हाल सकेंगे की नहीं !!! वास्तु ज्योतिष से इसका मार्गदर्शन मिल सकता है  कुण्ड  इसक़ाफ़ल  विचित्र है  પુત્તે જાયે કવગુણું...

आयुर्वेद ज्योतिष

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नीच के सूर्य की महादशा या अन्तर्दशा में ज्वर ,कुष्ठ,शिरोरोग,होता है। ।ब्रुहद निघण्टुरत्नाकर  … गर्भ स्थापन  गर्भदम  वटशृङ्गान्तु  …… पुष्येण  समाहृतम। ।   वट श्रृंग याने वट  के फल शुक्ल पक्ष में पुष्य नक्षत्र में लेकर पिने से गर्भ स्थापन शक्ति बढाती है !! . ... ६   में  शनि-हर्शल। राहु केतु मंगल नेप्ट्यून  रोग कष्ट करता करता है !! हर्शल से समाज में न आये ऐसे रोग होते है !! मंगल सारंगढ़ हर्निया शनि वधारवाल राहु केतु मंगल भगन्दर !! સ્વાદ ગ્રહો અને તત્વો

कछुआ जीतता है !! खरगोश से लम्बा आयु है !!

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कभी सुना है !! लेकिन आजकल तो दौडोही दौड़ो !! एक्शन !! बारहवी मंज़िल से छलांग लगाओ !!सर्कस !! इन्स स्टंट !!!नव मास क्यों बच्चा पेट में रहे!!! यद् रहे धीर: विर : !! कछुआ जीतता है !! खरगोश से लम्बा आयु है !!

त्याग से तो शांति मिलनी चाही ये !!

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कुछ लोग ऐसे फैक देते है कहते है लो त्याग किया !! त्याग से तो शांति मिलनी चाही ये !! गीता में देखे श्री कृष्णजी ने राजस त्याग का वर्णन किया है !!!