सहजं कर्म कौन्तेय ...... लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप नवंबर 16, 2008 शान्ति से क्रोध को मारों । नम्रता से अभिमान को जीतो । सरलता से माया का नाश करो । संतोष से लोभ को काबू में लो । अशुभ से नि वृत्ति और शुभ में प्रवृत्ती व्यवहार ये चारित्र्य है ।तू देव था सतत आचारी देव सेवा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
टिप्पणियाँ